स्कूली शिक्षा से वंचित बच्चों की एक मानक परिभाषा तय करने की पहल

स्कूली शिक्षा को बेहतर एवं आकर्षक
बनाने की पहल के तहत राष्ट्रीय शैक्षणिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए)
स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर रहने वाले बच्चों को परिभाषित करने समेत इनसे जुड़े
सभी आंकड़ों का मानकीकरण कर रहा है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा को प्री प्राइमरी
स्कूल से जोडने की भी कवायद की जा रही है। देश में शिक्षा से जुड़े विभिन्न
पक्षकारों ने यह भी तय किया है कि सभी राज्य निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का
अधिकार अधिनियम के अनुपालन की समीक्षा करेंगे। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री
सत्यपाल सिंह ने कहा कि उनकी अध्यक्षता में एक उप समिति बनी थी जिसकी रिपोर्ट में
शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) से जुड़े विषयों की व्यापक विवेचना की गई है। इसमें
यह सिफारिश की गई है कि स्कूली शिक्षा में प्री प्राइमरी स्कूल को जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि यह भी तय हुआ कि हर राज्य अपने अपने यहां आरटीई कानून के अनुपालन
की समीक्षा करेंगे। सिंह ने कहा कि
राष्ट्रीय शैक्षणिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) स्कूली शिक्षा के दायरे
से बाहर रहने वाले बच्चों की परिभाषा तय करने समेत इनसे जुड़े सभी आंकड़ों का
मानकीकरण तैयार करने की प्रक्रिया में है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में
काफी संख्या में बच्चे स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर हैं। पढ़ाई बीच में ही छोड़
देने वाले बच्चों की भी संख्या अधिक है। ऐसे में स्कूली शिक्षा को आकर्षक बनाया
जाना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों के अभिभावक, गांव
के प्रधान के ऊपर भी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि बच्चे स्कूल जाएं। उन्होंने कहा कि आिऽरकार आरटीई में अनिवार्य
शिक्षा की भी बात कही गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जाने माने अंतरिक्ष
वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली समिति अगले कुछ दिनों में नयी शिक्षा
नीति की मसौदा रिपोर्ट पेश कर देगी जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव की
रूपरेऽा तैयार की गई है। मानव संसाधन
विकास मंत्रलय से जुड़ी उप समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि स्कूली शिक्षा के
दायरे से बाहर सभी बच्चों को आधार नंबर दिया जाना चाहिए। सरकार को
आधार यूआईडी नंबर के साथ आधार आधारित
बाल निगरानी प्रणाली तैयार करनी चाहिए। इसे जिला स्तरीय आधार पर आगे बढ़ाना चाहिए।
रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई है कि स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर रहने वाले
बच्चों की एक मानक परिभाषा तैयार करने की जरूरत है। यह परिभाषा सार्वभौम होनी
चाहिए जिसका उपयोग देश के सभी डाटा इकट्टòा
कर सकें।
बच्चों की पहचान करना बडा़ मुद्दा
इसमें सुझाव दिया गया है कि स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर बच्चों की पहचान एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर रहने वाले बच्चों की पहचान के लिये एक मजबूत तंत्र स्थापित करना जरूरी है। इस तंत्र में स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर सभी श्रेणी के बच्चों के बारे में जानकारी दर्ज होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न मंत्रलयों ने अपनी कुछ योजनाओं के संदर्भ में लक्षित समूह की पहचान के लिये सर्वेक्षण कराया है। इनमें सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना, समन्वित बाल संरक्षण योजना, महिला एवं बाल विकास मंत्रलय से जुड़ी परियोजनाएं संबंधी सर्वेक्षण शामिल हैं। लेकिन ये सर्वेक्षण एकाकी रूप में हैं। ऐसे में स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर बच्चों का सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। उप समिति ने अपने सुझाव में कहा है कि काफी संख्या में छात्र ऐसे स्कूलों में जा रहे हैं जो मान्यता प्राप्त नहीं हैं। ऐसी गैर मान्यता प्राप्त संस्थाओं में गैर मान्यता प्राप्त स्कूल, गैर मान्यता प्राप्त मदरसे, वैदिक पाठशाला आदि शामिल हैं। ऐसे में सर्वेक्षण के दौरान इन गैर मान्यता प्राप्त संस्थाओं का मानचित्र तैयार किया जाना चाहिए